ज़िद्दी लेडी सरपंच: प्यासे गांव में हर घर पहुंचा दिया पानी!

हर घर की महिला सदस्य सहित पूरा परिवार का दिनभर पानी के जुगाड़ में भटकता.एक लेडी सरपंच की ज़िद ने न केवल हर घर पानी की व्यवस्था की बल्कि गांव की तस्वीर ही बदल दी.एक आदिवासी महिला सरपंच के ज़िद की कहानी पढ़िए.

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सरपंच आरती ने कराए गांव में तालाब, पोखर निर्माण Image-Ravivar

मध्य प्रदेश के खंडवा जिला अंतर्गत छैगांव माखन ब्लॉक के गांव चिचगोन-भेरुखेड़ा की यह कहानी है. यहां सरपंच आरती पटेल ने पिछले कुछ सालों में अपनी ज़िद से गांव में न केवल पेयजल सुविधा बल्कि अन्य काम कर मिसाल कायम की. कभी मायके में टीचर रही आरती बखूबी सरपंची का पद भी निभा रही है.      

छह हज़ार ग्रामीणों की बुझाई प्यास,दो साल में बदली तस्वीर 

चिचगोन-भेरुखेड़ा पंचायत में पिछले कुछ साल से महिलाएं और उनका परिवार सुकून की ज़िंदगी जी रहे.अब कोई यहां पानी की व्यवस्था में भटकता हुआ दिखाई नहीं देता है.
यहां रोस्टर मेथड से आदिवासी सीट आरक्षित हुई. आरती पटेल को मैदान में उतारा. कभी टीचर रही आरती को राजनीतिक समझ चाहे काम हो लेकिन चुनाव जीतते ही अपने लक्ष्य बनाए.

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वॉटर रिचार्ज पिट के भी गांव में दिखाई देंगे-Image: Ravivar

सरपंच आरती पटेल बताती है-"शुरू में अनुभव नहीं था पर गांव की समस्याओं को जानती थी. नल-जल योजना अंतर्गत सबसे पहले घर-घर में पानी पहुंचाने की ठानी.लगभग साढ़े 950 घरों में नल कनेक्शन किए और  को इस बड़ी परेशानी से मुक्ति दिलाई.यहां तक कि ग्रामीणों को प्रति माह 100 रुपए भी अधिक लगने लगे तो मीटिंग में 50 रुपए महीना तय किया.दो ट्यूबवेल के माध्यम से साढ़े छ हजार लोगों के गले तर हो रहे हैं.इसके अलावा दूसरे कामों से ग्रामीणों को रोजगार सहित पर्यावरण संरक्षण और सुविधाओं को उपलब्ध कराया."


गैर राजनीतिक परिवार से जुड़ी होने के बावजूद आरती ने गांव के विकास में जुटी है. गांव की दुर्गा बाई कहती है-"हमारी पूरी उम्र खेत और ट्यूबवेल से पानी भरने चली गई. आरती के सरपंच काल में हमें बड़ी-बड़ी सौगातें मिली.हमें पानी के साथ पक्की सड़कों पर चलने का मौका भी मिला. अभी तक हम कच्ची गलियों में कीचड़ भरे रास्तों पर भी चले को विवश थे."

काम को मिली पहचान, अवार्ड तक छू ली मंज़िल 

चिचगोन-भेरुखेड़ा जैसे छोटे से गांव में हुए कामों को पहचान मिलना शुरू हुई. नतीजा ये हुआ ये हुआ कि आरती पटेल को ग्रामीण एवं पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा सम्मानित किया गया. 
इस गांव में विकास के नाम पर आरती पटेल आगे बताती है-"हमने किसानों और गांव के मवेशियों तक का ध्यान रखा. एक तालाब निर्माण सहित 3 पोखर बनवाए. इन पोखरों से मवेशियों को पानी पीने की सुविधा मिल गई.तालाब से लगभग 25 एकड़ ज़मीन सिंचित होने लगी. गांव में पक्की सड़कों सहित सामुदायिक भवन भी बनवा दिए. अब गांववासी अपने निजी आयोजनों के लिए भटकते नहीं हैं.मुझे ख़ुशी है कि पिछले वर्ष जल गंगा अभियान में सराहनीय काम के लिए मुझे सम्मानित किया गया."

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रोजगार और पर्यावरण के लिए कुंटूर ट्रेंच तैयार करते श्रमिक-Image:Ravivar

इन सभी विकास कामों में आरती के पति अनिल पटेल और अन्य ग्रामीण लगातार सहयोग दे रहे. खेत तालाब योजना में भी या गांव पीछे नहीं रहा. 8 किसानों को इस योजना का लाभ दिलवाया. 
महिला किसान अनीता बाई हीरा लाल कहती है-"खेत में तालाब बन जाने से सिचाईं सुविधा मिल गई और  हमरी फसल का उत्पादन बढ़ गया."

सूखी ज़मीनों में दिखने लगी नमी, फूटने लगी झिरन 

इस गांव में कभी लोग पानी को तरसते थे लेकिन अब यहां वॉटर रिचार्ज का असर दिखने लगा. यहां 36 स्थानों पर रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम और 40 घरों में वॉटर रिचार्ज पिट बना लिए. इन घरों में नई झिरन के साथ जल स्तर बढ़ा. यहां तक कि सूखी ज़मीन में नमी दिखने लगी. काम यहीं नहीं रुके, एक बगिया मां के नाम अंतर्गत भी 27 किसाओं को 100 -100 फलदार पौधे उपलब्ध करवाए गए.    
कुंटूर ट्रेंच सहित कई कामों से गांव ने विकास की नई इबारत लिख दी.

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Dr.Nagarjun Gauda, CEO Zila Panchayat

"मुझे प्रसन्नता है कि खंडवा ज़िले कि पंचायतों में महिला सरपंच विकासात्मक कामों में सफल हो रहीं है. चिचगोन-भेरूगढ़ पंचायत में भी पर्यावरण,पेयजल और रोजगारोन्मुखी काम से मिसाल कायम की है. हम लगातार सरपंचों को प्रोत्साहित कर रहें हैं."

डॉ.नागार्जुन गौड़ा, आयएएस, सीईओ, जिला पंचायत, खंडवा

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