Budget 2026 में महिलाओं के लिए बड़ी पहल: हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल और SHG के लिए ‘SHE Marts’

Union Budget 2026 में महिलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल और ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम से जुड़े ‘SHE Marts’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया.

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रिसिका जोशी
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में लोकसभा में 'केंद्रीय बजट 2026-27' पेश किया. Photograph: (google)

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को महिलाओं की उच्च शिक्षा तक पहुंच को मजबूत करने और स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों को उद्यमिता की अगली सीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों की घोषणा की. उन्होंने हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने और community-owned “SHE Marts” स्थापित करने की योजना भी पेश की.

Union Budget 2026 के तहत इन प्रस्तावों को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई कदम उठा रही है. इसमें नए संस्थानों की स्थापना, टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और गर्ल्स हॉस्टल शामिल हैं. उन्होंने कहा —

“मैंने उच्च शिक्षा क्षेत्र में निवेश के तहत नए संस्थानों, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, गर्ल्स हॉस्टल और टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की स्थापना के लिए कई कदम प्रस्तावित किए हैं. देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाया जाएगा "


STEM चुनौतियों से जुड़ी उच्च शिक्षा और गर्ल्स हॉस्टल की पहल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उच्च शिक्षा में, विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी (STEM) से जुड़े पाठ्यक्रमों में, लंबे अध्ययन घंटे और प्रयोगशाला कार्य छात्राओं के लिए व्यावहारिक चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं. उन्होंने कहा —

“उच्च शिक्षा में STEM संस्थानों में लंबे समय तक पढ़ाई और लैब में काम करना छात्राओं के लिए कई बार कठिन हो जाता है.”

सीतारमण ने बताया कि प्रस्तावित गर्ल्स हॉस्टल सुरक्षित और सुलभ आवास उपलब्ध कराएंगे, जिससे छात्राओं की उच्च शिक्षा तक पहुंच बेहतर होगी। यह पहल उन्नत विषयों में नामांकन और पढ़ाई जारी रखने को भी प्रोत्साहित करेगी. ANI के अनुसार, वित्त मंत्री ने इस योजना को एस्ट्रोफिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के प्रयासों से भी जोड़ा.

‘SHE Marts’ क्या हैं?

शिक्षा के साथ-साथ, सीतारमण ने “SHE Marts” की भी घोषणा की. ये self-help entrepreneur marts होंगे, जिन्हें community-owned retail outlets के रूप में विकसित किया जाएगा और यह ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम पर आधारित होंगे.
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा —

“Self-help groups के मार्ट्स को cluster-level federations के भीतर community-owned retail outlets के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिन्हें बेहतर और नवोन्मेषी वित्तीय सहायता दी जाएगी, ताकि महिलाएँ उद्यमिता में अगला कदम उठा सकें.”

सीतारमण ने इसे SHG सदस्यों के लिए “enterprise owners” बनने की दिशा में अगला कदम बताया. 

 कौन कहलाती है ‘लखपति दीदी’?

जिस SHG सदस्य की वार्षिक घरेलू आय कम से कम ₹1 लाख तक पहुँच जाती है, उसे ‘लखपति दीदी’ माना जाता है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, अब तक दो करोड़ से अधिक महिलाएँ यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं, जबकि 2027 तक तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है.