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Ejaculating Without Penetration Isn't Rape": Chhattisgarh High Court Photograph: (google)
हाईकोर्ट की नजर में गवाही: पेनिट्रेशन और बलात्कार प्रयास
क्रॉस-एक्ज़ामिनेशन में पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने अपने अंग को उसके योनि के ऊपर रखा, लेकिन प्रवेश नहीं किया. दूसरी बार उसने कहा कि प्रवेश हुआ. हाईकोर्ट ने इस विरोधाभास को महत्वपूर्ण माना.
कोर्ट ने कहा, “जब अभियोजन पक्ष की गवाही को सही दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि वास्तविक बलात्कार साबित नहीं हुआ है, क्योंकि पीड़िता के अपने बयान में संदेह पैदा होता है.”
पीड़िता ने कहा कि एक बार प्रवेश हुआ, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि आरोपी ने लगभग 10 मिनट तक अपना अंग उसके ऊपर रखा, लेकिन प्रवेश नहीं किया.
चिकित्सकीय निष्कर्षों की जांच
कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्य की भी समीक्षा की. चिकित्सक ने कहा कि हाइमेन फटा नहीं था, हालांकि “एक उंगली का सिर अंदर डाला जा सकता था, इसलिए आंशिक प्रवेश की संभावना है.”
चिकित्सक ने योनि में लालिमा और सफेद द्रव की उपस्थिति दर्ज की, लेकिन बलात्कार के commission के बारे में कोई निश्चित राय नहीं दी. उन्होंने क्रॉस-एक्ज़ामिनेशन में दोहराया कि केवल आंशिक प्रवेश संभव था.
कोर्ट ने कहा, “यह साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि बलात्कार का प्रयास किया गया, लेकिन पूर्ण बलात्कार नहीं हुआ.” कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि थोड़ी भी प्रवेश Section 376 IPC के तहत दंडनीय है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट साक्ष्य होना जरूरी है कि आरोपी का कोई अंग महिला के योनि में था.
तैयारी से प्रयास तक
कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता को जबरन कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद किया, दोनों को निर्वस्त्र किया और अपने जननांग को उसके साथ रगड़ा.
कोर्ट ने कहा, “पीड़िता को कमरे में जबरन ले जाना और दरवाजा बंद करना केवल अपराध की ‘तैयारी’ थी. इसके बाद के कार्य – दोनों को निर्वस्त्र करना, जननांग को रगड़ना और आंशिक प्रवेश – स्पष्ट रूप से बलात्कार करने का प्रयास था.”
हालांकि, चूंकि प्रवेश पूरी तरह से साबित नहीं हुआ, इसलिए कार्य पूर्ण बलात्कार नहीं माना गया. कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कार्य तैयारी से आगे बढ़कर बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है और Section 511 पढ़ित Section 375 IPC के तहत दंडनीय है.
साथ ही, कोर्ट ने चेतावनी दी कि कभी-कभी अभद्र आचरण को बलात्कार के प्रयास के रूप में बढ़ा-चढ़ा कर देखा जाता है. पीड़िता के बयान में विरोधाभासों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि वास्तविक बलात्कार स्थापित नहीं हुआ.
सजा घटाई गई
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सजा को तीन साल छह महीने कर दिया. आरोपी को निर्देश दिया गया कि वह दो महीने के भीतर शेष अवधि की सजा भुगतने के लिए जेल में आत्मसमर्पण करे.
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी ने 3 जून 2004 से 6 अप्रैल 2005 तक जेल में समय बिताया और बाद में 6 जुलाई 2005 को जमानत मिलने के बाद तीन महीने और जेल में रहा. उसे कानून के अनुसार समायोजन (set-off) का लाभ मिलेगा.
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