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Image- Ravivar vichar
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"आज की छोरिया, छोरो से कम कोणी!"- इसी कथन के साथ आज की महिलाएं आगे बढ़ रही है, अपने देश का नाम रोशन कर रहीं है.सिर्फ शहरों में ही नहीं बल्कि गाँवों में भी महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल रहीं हैं, इसी से प्रेरित होते हुए ममता ढिंढोरे ने Self help group बनाया, और अपने साथ 7500 महिलाओं को जोड़कर एक नयी कहानी की शुरुआत करी एक नई कहानी की शुरुआत की.
आज वे सब self help group के माध्यम से इतनी काबिल है कि स्वयं प्रधानमंत्री ने उन्हें Virtual बैठक मे सम्मानित किआ और उन्के कामों की प्रशंसा की. Virtual बैठक मे लाखो लाभार्थियों ने हिस्सा लिआ परन्तु सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र बनी कल्पना बाई और साई किन्नर, जो एक self help group की नेता भी है
Image Credits- ARF LAB
कल्पना बाई ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि वे कभी सड़कों पर भीख मांगा करती थी और आज वे एक ट्रांसजेंडर कम्युनिटी का नेतृत्व कर रहीं है जो एक self help group भी है. इस समूह से सारे members transgender community के है जिनका मुख्य काम टोकरी बनाना और इडली डोसा का व्यवसाय करना है. इस माधयम से कल्पना बाई ट्रांसजेंडर्स को आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहीं हैं.
अगर हम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का डाटा देखे तो हमे पता चलेगा कि national rural livelihood mission (NRLM) के तहत लगभग 9 करोड़ महिलाएं लगभग 83.5 लाख SHGs से जुड़ी हुई हैं. PM Narendra Modi ने भी पूरी बैठक में women empowerment की बात की और योजनाओं के बारे में सभी को अवगत किया. इन्हीं योजनाओ के लाभ से आज 2 करोड़ भारतीय महिलाएं Lakhpati didi बनने के लिए तैयार है.