NPA कटौती में मदद करती BC सखी

स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा लिए गए लोन में NPA का आंकड़ा 1.6% है. 2014 में यह NPA 9.58%, एनपीए में आई इस बड़ी कटौती में महत्वपूर्ण योगदान बैंकिंग कोरेस्पॉन्डेंट (बीसी सखी) का रहा.

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किरण मुरिया
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बैंकिंग कोरेस्पॉन्डेंट (BC Sakhi) या Bank Sakhi ग्रामीण भारत में समृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है. इनका योगदान न केवल ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं को पहुंचाने में है, बल्कि अपने गांव के स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों की आर्थिक समस्याओं का समाधान भी करती है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, लगभग 1,22,915 BC सखी महिलाएं है जो ग्रामीण क्षेत्रों में डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएं लगातार दे रहीं है.

Bank sakhis कर रहीं स्वयं सहायता समूहों को सशक्त

BC सखियों का कार्य बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों की सेवाओं को पहुंचाती है और असमायिक तौर पर ग्राहकों को सहायता प्रदान करती है. ये सखियां SHGs के सदस्यों से जुड़कर उनके वित्तीय संगठन में मदद करती है. वे इन समूहों को बैंकों की तरफ से उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी प्रदान देने के साथ SHGs को बैंक के साथ सहयोग करने में मदद करती है.

ऐसे समय में जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के Non Profit Assets (NPA एनपीए) 5% है, स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा लिए गए लोन में यह आंकड़ा 1.6% है. 2014 में यह NPA 9.58%, एनपीए में आई इस बड़ी कटौती में महत्वपूर्ण योगदान बैंकिंग कोरेस्पॉन्डेंट (बीसी सखी) का रहा.

Self Help Groups की वह महिलाएं जिनके पास कम से कम 10वीं कक्षा तक शिक्षा है, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है और बीसी सखी या बैंक सखी बनाया जाता है. ग्रामीण विकास मंत्रालय का लक्ष्य देश की सभी लगभग 2.5 लाख पंचायतों में कम से कम एक बीसी सखी रखना है.  ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि- "इन महिलाओं ने एनपीए दरों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है". श्री सिंह ने आगे कहा, "2014 से पहले की सरकारें एसएचजी को संभालने में विश्वास करती थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार स्थायी आजीविका में विश्वास करती है"

संस्थागत वित्त तक पहुंच और ब्याज पर छूट से इन एसएचजी में महिलाओं के लिए बहुत बड़ा अंतर आया है, जिससे उनके द्वारा लिए गए लोन के भुगतान में सुधार हुआ है. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 42,666 बैंक सखियां हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश (10,850) और राजस्थान (10,559) है.

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को वित्तीय साक्षरता प्रदान करना भी ग्रामीण विकास मंत्रालय के फोकस में है. इस पर श्री सिंह ने बताया "2.75 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्तीय साक्षरता में प्रशिक्षित किया गया है ". मंत्री ने कहा कि ये कदम सरकार द्वारा घोषित 'लखपति दीदी' योजना के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महिला एसएचजी सदस्यों को प्रति वर्ष ₹1 लाख से अधिक कमाने में सक्षम बनाने की नींव को मजबूत करेंगे. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2023 को 'लखपति दीदी' योजना की घोषणा की थी. शुरुआत में, सरकार का लक्ष्य दो करोड़ महिलाओं को प्रति वर्ष ₹1 लाख कमाने में सक्षम बनाना था, जिसे बजट में संशोधित किया गया और लक्ष्य तीन करोड़ महिलाओं का कर दिया गया .

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