अनूठी शाला: कृषि सखियों की पाठशाला में किसानों का 'दाखिला'

आपको एक अनूठी पाठशाला में ले चलते हैं. आपको लग रहा होगा अनूठी मतलब और क्या ! इस क्लास में न तो क्लास के स्टूडेंट्स हैं न ही टीचर. क्लास में टीचर किसान दीदी और स्टूडेंट्स हैं किसान.

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Rohan
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इंदौर ज़िले में कृषि पाठशाला के लिए समूह में खड़ी सदस्य-Image :Ravivar

यदि हम पाठशाला या क्लास रूम की बात करते हैं तो एकदम स्कूल और उसके कैंपस में दौड़ते भागते बच्चे और क्लास रूम पढ़ाई करते हुए विद्यार्थी के सामने टीचर की शक्ल दिखाई देने लगेगी.
हम आपको एक अनूठी पाठशाला में ले चलते हैं.अनूठी !! आपको लग रहा होगा अनूठी मतलब और क्या नया होगा ! इस क्लास में न तो क्लास के स्टूडेंट्स हैं न ही कोई सिलेबस पढ़ाते हुए टीचर.इस क्लास में टीचर बनी हैं कुछ किसान दीदी और स्टूडेंट्स हैं किसान भाई-बहन.आप अंदाज़ा लगा सकते हैं आखिर ये क्लास में क्यों अनूठापन है.
आइए इस क्लास के कुछ स्टूडेंट्स और पढ़ाने वाली कृषि सखी टीचर से मिलवाते हैं.....पढ़िए 

गांवों में नज़र आने लगे किचन गार्डन

प्रदेश के इंदौर जैसे ज़िले में अनूठी पाठ शालाएं संचालित हो रहीं हैं.
ज़िले के महू जनपद अंतर्गत काम कर रही संध्या सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष और कृषि सखी पवित्रा निनामा कहती हैं -"हमारे लिए एक नया अनुभव रहा.मैंने पांच गांव में 100 से ज्यादा किसान दीदी के परिवारों को किचन गार्डन लगाने के लिए प्रेरित किया.इससे प्राकृतिक खेती को जहां बढ़ावा मिला रहा वहीं किसानों को आर्थिक बचत के साथ स्वास्थ्य पर भी पॉजिटिव प्रभाव पड़ने लगा।अब ये किसान परिवार घर की सब्जियां उपयोग में ला रहे.इसके अलावा जीवामृत, बीजामृत, काढ़ा  बनाना सिखाया.सवा सौ से ज्यादा किसानों के खेतों की सॉइल टेस्टिंग भी करा चुकी हूं।"

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इंदौर ज़िले में प्रकृतिक किचन गार्डन तैयार करना सिखाती कृषि सखी पवित्रा -Image :Ravivar

ऐसे अनेक किसानों को ग्रामीण इलाकों में जाकर कृषि सखी प्रशिक्षित कर रही हैं.बदलाव नज़र आने लगा है.पवित्रा पशु सखी के रूप में भी किसानों के मवेशियों के रख-रखाव के लिए ट्रेनिंग दे रही. 
कोलानी गांव की रहने वाली स्वयं सहायता समूह की प्रमिला वसुनिया कहती है -"हमने तो कभी सोचा भी नहीं था जो खेती में सुधार नज़र आया.मैं अब किचन गार्डन में सब्जियां उगा रही हूं." 

घरों में दिखने लगा उपार्जन कारोबार का असर 

किसान परिवार सिर्फ खेती में बदलाव तक ही सिमित नहीं रहे.यहां एसएचजी से जुड़ी सदस्य महिलाएं अनाज उपार्जन के काम भी कर रहीं.बदलती आर्थिक स्थिति का असर घरों में दिखने लगा.
आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक मॉनिटरिंग (कृषि) गायत्री राठौड़ बताती हैं -"ज़िले में किसान दीदियों के प्रयास से किसान परिवारों में संपन्नता दिखने लगी.इस क्षेत्र में 34 प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से समूह की सदस्य उपार्जन का काम कर रहीं हैं.देपालपुर ब्लॉक में स्वयं सहायता समूह पीजी से जुड़ कर गेहूं ,मूंग आदि की खरीदी कर मंडी तक पहुंचा रहे.ऐसे ही महू ब्लॉक में आलू का कारोबार प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़कर सदस्य कर रहीं हैं.यही उपार्जन का काम धुलेट गांव में महिला शक्ति उत्पादक समूह की महिलाएं भी कर रहीं हैं।"   

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इंदौर के धुलेट गांव में उपार्जन में व्यस्त समूह सदस्य -Image :Ravivar

लगातार पीजी (प्रोड्यूसर कंपनी) का गठन किया जा रहा है.
डे एसआरएलएम इंदौर के जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला कहते हैं -"कृषि पाठशाला जैसा यह नवाचार सफल रहा.स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाओं को अपने नियमित काम के साथ नया काम मिला.उनको आर्थिक मजबूती मिल रही है।हम लगातार किसान सखियों को किसानों के बीच भेज कर पाठशाला संचालित करवा रहे.अभी तक 50 से अधिक गांवों 100 किसान पाठशाला संचालित की जा चुकी है.यह संख्या लगातार बढ़ रही है."
इंदौर ज़िले में अनाज के साथ 'एक जिला एक उत्पाद' में आलू उत्पादन के बाद समूह की सदस्य इनका कारोबार में अपना हिस्सा बढ़ा रही हैं.  

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IAS Siddharth Jain,CEO Jila Panchayat

"मुझे ख़ुशी है कि इंदौर ज़िले में आजीविका समूह से जुड़ी सदस्य कृषि पाठशालों का आयोजन कर रहीं हैं.किसानों को निःशुल्क जानकारी के साथ खेती की सही टेक्निक समझने का मौका मिला रहा है.हम लगातार कृषि सखियों के साथ किसाओं को इन संचालित की जा रही कृषि पाठशाला में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।"

सिद्धार्थ जैन,आयएएस ,सीईओ जिला पंचायत,इंदौर    

आजीविका मिशन स्वयं सहायता समूह सेल्फ हेल्प ग्रुप