"No Men Allowed", Finland के इस आइलैंड पर पुरुषों को एंट्री नहीं, आइये जानते है कौनसा है ये आइलैंड?

फ़िनलैंड का सुपरशी आइलैंड एक महिलाओं-केवल लग्ज़री द्वीप है, जहां पुरुषों की एंट्री नहीं है और महिलाएं शांति, आत्मचिंतन और विश्राम के लिए आती हैं.

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रिसिका जोशी
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Supershe Island Finland

Image Credits: Ravivar Vichar

Finland का SuperSheIsland, जहां पुरुषों की एंट्री नहीं है!

कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जहां किसी की नज़रें आपको आंक नहीं रहीं, जहां आपको हर समय कुछ साबित नहीं करना, जहां शरीर, उम्र या चुनाव पर सवाल नहीं उठते. एक ऐसी जगह, जहां थकान को छुपाना नहीं पड़ता.

अब सोचिए — इस जगह का एक ही नियम है: यहां पुरुषों की एंट्री नहीं है.

यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है. फ़िनलैंड के तट के पास स्थित सुपरशी आइलैंड (SuperShe Island) इस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. यह एक प्राइवेट, लग्ज़री, महिलाओं के लिए बनाया गया द्वीप है, जहां महिलाएं सिर्फ़ छुट्टियां मनाने नहीं, बल्कि खुद से मिलने आती हैं.

विरोध नहीं, विश्राम का विचार

SuperShe Island किसी पुरुष-विरोधी सोच से पैदा नहीं हुआ. यह किसी ग़ुस्से या टकराव का परिणाम नहीं है. इसकी कल्पना करने वाली उद्यमी Kristina Roth का कहना है कि यह जगह महिलाओं को बाहर करने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं को पूरी तरह भीतर आने देने के लिए बनाई गई है. यहां महिलाओं को परफ़ॉर्म नहीं करना पड़ता. यहां सुंदर दिखने का दबाव नहीं. यहां किसी भूमिका में फिट होने की मजबूरी नहीं. यहां महिलाएं सिर्फ़ हो सकती हैं.

जब महिलाएं अकेली होती हैं- साथ में

इस द्वीप पर दिन की शुरुआत योग और ध्यान से होती है. समुद्र के किनारे सॉना, जंगलों में वॉक, कायकिंग, और फिर लंबी बातचीत — काम पर, रिश्तों पर, थकान पर, जीवन पर. यहां कोई तेज़ संगीत नहीं, कोई दिखावे वाली पार्टी नहीं. एक समय में बहुत कम महिलाएं यहां ठहरती हैं, जिससे यह जगह भीड़ नहीं, सहजता बन जाती है. यहां लग्ज़री का मतलब महंगे झूमर नहीं, बल्कि मानसिक शांति और समय की आज़ादी (women safety) है.

यह विचार लोगों को असहज क्यों कर रहा है

“No Men Allowed”- ये तीन शब्द सोशल मीडिया पर बहस छेड़ चुके हैं. कुछ लोग इसे भेदभाव कहते हैं, कुछ इसे ज़रूरत. लेकिन सवाल यह है कि पुरुषों के लिए बनी जगहें, क्लब, या सत्ता के केंद्र सदियों से मौजूद हैं- बिना किसी बहस के. फिर जब महिलाएं शांति के लिए एक जगह चाहती हैं, तो विवाद क्यों? शायद इसलिए क्योंकि जब महिलाएं अलग होकर सुकून चुनती हैं, तो उसे अक्सर ग़लत समझ लिया जाता है.

एक बड़े सच की झलक

इस द्वीप की लोकप्रियता सिर्फ़ ट्रैवल ट्रेंड नहीं है. यह बताती है कि आज की महिलाएं कितनी थकी हुई हैं — मानसिक रूप से, भावनात्मक रूप से, सामाजिक रूप से (women empowerment). वे हर जगह दिखती हैं, हर भूमिका निभाती हैं, हर ज़िम्मेदारी उठाती हैं. ऐसे में एक ऐसी जगह, जहां कुछ भी साबित न करना पड़े, क्रांतिकारी नहीं, ज़रूरी लगती है.

सिर्फ़ एक जगह नहीं, एक विचार

हर महिला सुपरशी आइलैंड नहीं जाएगी. हर महिला जाना भी नहीं चाहेगी. लेकिन बहुत सी महिलाएं उस भावना को समझती हैं, जो इसके पीछे है. यह जगह लग्ज़री की नहीं, इजाज़त की बात करती है- आराम करने की, सांस लेने की, और बिना सफ़ाई दिए खुद होने की.

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