दुनिया की सबसे छोटी तीरंदाज है अदिति स्वामी

Aditi Swami मात्र 17 साल की है और इतनी छोटी सी उम्र में यह बच्ची दुनिया की सबसे बेहतरीन Archer बन चुकी है. 9 january 2024 को अदिति को president Droupadi Murmu ने Arjuna Award से सम्मानित किया है.

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रिसिका जोशी
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aditi swami youngest archer

Image- Ravivar vichar

वो कहानी तो सुनी होगी आपने, जिसमें द्रोणाचार्य ने सारे पांडवों से पूछा था कि इस मछली कि आंख को निशाना बनाना है और सिर्फ अर्जुन को ही उस मछली कि आंख के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था. हर बच्चें को बचपन में सुनाई जाती है ये कहानी. लेकिन कुछ ही बच्चें होते है जो इस कहानी को अपनी ज़िंदगी में बेहद गंभीरता से लेते है. उन ही कुछ गिने चुने बच्चों में से एक और बच्ची है Aditi Swami.

Archer Aditi Swami को राष्ट्रपति ने Arjuna Award से सम्मानित किया

गौर करियेगा मैंने 'बच्ची' कहा क्योंकि Aditi Swami मात्र 17 साल की है और इतनी छोटी सी उम्र में यह बच्ची दुनिया की सबसे बेहतरीन Archer बन चुकी है. 9 january 2024 को अदिति को president Droupadi Murmu ने Arjuna Award से सम्मानित किया है. अदिति ने इस छोटी सी उम्र में जो उपलब्धि हासिल की है वो लोग पूरी ज़िंदगी में भी नहीं कर पाते.

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aditi swami archery champion

Image credits: Times now navbharat

 

Aditi Swami के पिता गोपीचंद है उसकी जीत के पीछे का सबसे बड़ा हाथ

भले ही Aditi Swami के घर पर पैसो को लेकर परेशानी हो, लेकिन उसके पिता को एक बात बहुत अच्छे से पता थी कि मेरी बेटी का जो भी सपना होगा वो पूरा करना मेरी ज़िम्मेदारी है. अपने विद्यालय में कुछ extra marks हासिल करने के लिए Aditi Swami ने archery चुनी थी. लेकिन उस वक़्त उसे नहीं पता था कि यह विषय उसकी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन जाएगा.

Aditi swami archery में बेहद दिलचस्पी लेने लगी. उसने यह बात अपने घर पर बताई तो घर वाले थोड़ा परेशान ज़रूर  हुए होंगे क्योंकि उनके गाँव में इस तरह की इच्छा शायद आजतक किसी ने नहीं की थी. लेकिन Aditi swami के पिता गोपीचंद ने जो फैसला किया था उसको पूरा करने के बारे में सोच लिया. वह Aditi को सातारा लेकर चले गए और वहां उसे तीरंदाजी सिखाना शुरू कर दिया.

उसके पिता ने हर कोशिश की और अदिति को हर सुविधा देने का प्रयास किया. ढाई लाख का bow 50 हज़ार के arrow... अच्छा खासा व्यक्ति ये सब दिलवाने में 2 बार सोचे लेकिन Aditi Swami के पिता ने बिना कुछ भी सोचे अपनी बेटी को हर सुविधा दिलाने का प्रयास किया. इस प्रयास में सब कुछ सही रहा हो ऐसा तो कभी किसी के साथ होता ही नहीं, तो यहाँ कैसे होता? 

परेशानियां आई और सबसे बड़ी परेशानी थी बेटी को इस मुकाम तब पहुंचाने में लिया हुआ कर्जा, जो बढ़ते बढ़ते 10 लाख तब पहुंच गया. लेकिन इतने के बाद भी गोपीचंद बिल्कुल भी घबराए नहीं. वे जानते थे कि उनकी बेटी में जितनी क्षमता है वो इस परेशानी से बहुत बड़ी है. आज उनकी बेटी ने इस मुकाम पर पहुंच कर सारे कर्जे चूका दिए अपने पिता के. Aditi Swami World Archery youth championship 2023 में अपने नाम 2 gold medals कर चुकी है.

और आज Aditi swami भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सबसे छोटी archer बन चुकी है. यह कहानी हर उस व्यक्ति को पढ़ना बेहद ज़रूरी है जो अपने उम्र को बाधा के रूप में देखता है. उम्र सिर्फ एक अंक है, सारी काबिलियत इंसान के दिमाग में दिल में होती है. जिस दिन वह ठान ले कि कोई काम करना है उस दिन नसीब भी उसके आगे झुक जाता है और अपना हर रास्ता खोल देता है. परेशानियां तो आती ही है और आएंगी भी, लेकिन हार मानना किसी भी चीज़ का उत्तर ना कभी था और ना ही कभी होगा. 

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