राशन की दुकानों से खुले महिलाओं के रोजगार के रास्ते

सरकार की PDS दुकानों का संचालन महिलाओं को सौंप दिया.इस पहल से कई महिलाओं के रोजगार के रास्ते खुल गए.ये महिला अब अच्छे से राशन की दुकाने चला रहीं.ये महिला अब अच्छे से राशन की दुकानें चला रहीं.आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास नज़र आ रहा.

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राशन की दुकानों से खुले महिला रोजगार के रास्ते

राशन की दुकान संचालित करतीं हुई एनाबाद की अनीता गोस्वामी (Image: Ravivar Vichar)

MP के Dewas जिले में  self help group की महिलाओं को public distribution scheme के तहत राशन की दुकानों का संचालन सौंपा.इसकी केवाज में इन महिलाओं को निर्धारित कमीशन  मिल रहा.अब ये महिलाएं अपने परिवार में आत्मनिर्भर हो गईं.

200 दुकानों का संचालन SHG के हाथों में 

देवास जिले में Ajeevika Mission के अंतर्गत 200  SHG राशन की दुकानें अलग-अलग इलाके में दुकानें चला रहीं.

जिले के सोनकच्छ ब्लॉक के एनाबाद गांव की जय गुरुदेव आजीविका मिशन की अनीता गोस्वामी बताती है-"स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद परिवार में सम्मान भी बढ़ा.मैं घर के साथ राशन की दुकान पर सेल्सवुमन की जवाबदारी संभाल रही.हमारे गांव में बहुओं के लिए घूंघट प्रथा है.बावजूद मुझे ससुराल ने परमिशन दी.अब कमाई बढ़ गई."

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देवसिरालिया गांव की समूह संचालक कोमल मीणा (Image: Ravivar Vichar)  

जिले में हर गांव में कम से कम एक सोसाइटी दुकान self help group की सदस्य को दी गई. ये महिलाएं सर्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत इन दुकानों से धान,गेहूं और शकर का वितरण उचित मूल्य पर करती है.इसी तरह कनौद ब्लॉक के देवसिरालिया गांव की कोमल मीणा कहती है-"मुझे समूह से जुड़ने के बाद आजीविका मिशन ने CRP बनाया.इसके साथ मैंने कई महिलाओं को SHG से जोड़ा.सोसाइटी की दुकान पर संचालन का अवसर मिलने पर और अधिक काम के साथ आर्थिक स्थिति भी सुधर गई."                      

SHG  की एक हज़ार महिलाओं को मिला रोजगार 

सेल्सवुमन बनी इन महिलाओं  को कमीशन के रूप में प्रति माह 10 हज़ार रुपए दिए जाते हैं.जिले के टोंकखुर्द ब्लॉक की चिड़ावद गांव कृष्णा आजीविका मिशन की भावना शिवहरे का भी कहना है-"राशन की दुकानों के संचालन में काम करने से परिवारों को समय पर राशन देते हैं.हर महीने दस हज़ार रुपए मिल जाते हैं.आर्थिक स्थिति हमारी बहुत अच्छी होने लगी."

Dewas जिले के सोनकच्छ के BM Virendra Chauhan और Tonk की BM Kiran Kushwah कहते हैं-"समूह की महिलाएं पहले CRP और BC के रुपए में अपनी अच्छी सेवाएं दे रहीं.अब सेल्समेन के रूप में भी सफल हुईं.ये नियमानुसार काम कर रहीं."

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चिड़ावद में दुकान संभालती भावना शिवहरे (Image: Ravivar Vichar)  

Ajeevika Mission की District Project Manager (DPM) Sheela Shukla कहती हैं-"हमें ख़ुशी है कि जिले में स्वयं सहायता समूह की सदस्य दुकानों का अच्छा संचालन कर रहीं.200 दुकानों से अब तक 1 हज़ार से ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिला.यह आगे और संख्या बढ़ भी सकती है."

देवास जिले में ही महिलाओं को दीदी कैफे सहित कई जगह काम दिया गया. Dewas कलेक्टर DM IAS Rishav Gupta कहते हैं-"महिलाएं ज्यादा संवेदनशील होतीं हैं.घर की जरूरतों को ज्यादा बेहतर समझती हैं.राशन दुकानों पर संचालन भी बढ़िया कर नई मिसाल कायम की.महिलाओं को और रोजगार के अवसर दिए जा रहे."

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self help group Ajeevika Mission CRP public distribution scheme