JHABUA की 15 पंचायतों में चखेंगे SHG की बनी मीठी बूंदी का स्वाद

झाबुआ की 15 आदिवासी पंचायतों में इस बार SHG कीहाथों की बनी मीठी बूंदी (नुक्ती) का स्वाद बच्चे और लोग चखेंगे .26 जनवरी Republic Day पर पंचायतों में उत्साह है. कई पंचायतों ने इस बार SHG समूह की महिलाओं को काम दिया.  

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JHABUA की 15 पंचायतों में चखेंगे SHG

पारा में अपनी दुकान चलाती चंपा प्रजापत (Image: Ravivar Vichar)     

MP के JHABUA जिले के Para गांव में इस बार self help group की महिलाएं आखरी समय तक मीठी बूंदी (नुक्ती) बनाने में व्यस्त हैं. यह राष्ट्रीय पर्व के खास मौके पर स्कूल, पंचायतों में ऑर्डर पर सप्लाई की जाएगी.       

पहला ही ऑर्डर SHG को मिला 25 किलो मीठी बूंदी सप्लाई का

झाबुआ जैसे आदिवासी इलाके के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी खुश हैं. उनको Republic Day पर मिठाई के रूप में मोतीचूर मीठी बूंदी (नुक्ती) वितरित होगी. यहां के समूह को पहला ऑर्डर ही मीठी बूंदी (नुक्ती) सप्लाई का 25 किलो का मिल गया. पारा गांव की चंपा प्रजापत बताती है-"मैं मनोरमा समूह से जुड़ी. गांव में छोटी से चाय-नाश्ता की दुकान से शुरुआत की.धीरे-धीरे काम ठीक चलने लगा. 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को लड्डुओं बनाने का ऑर्डर भी मिलने लगे. इस बार भी हमें 15 पंचायतों में लगभग 40 किलो मोतीचूर मीठी बूंदी (नुक्ती) सप्लाई करना है. हम शुद्धता का पूरा ध्यान रखते हैं.इस बार भी हमारी अलग से कमाई हो जाएगी."

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 Image: Ravivar Vichar

चंपा दीदी की self help group से जुड़ने से पहले कोई खास कमाई नहीं थी. अब गांव में सभी पहचान रखने लगे.       

JHABUA में SHG को मिलेगा और रोजगार

Tribal Society और Tribal Self Help Group बहुल झाबुआ जिले में लगातार महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा. झाबुआ Tribal Doll और Traditional Painting के अलावा महिलाएं कई काम कर रहीं. झाबुआ के रामा ब्लॉक की Ajeevika Mission BM Asha Sharma बताती हैं-"पारा पंचायत के मनोरमा SHG समूह को यह बड़ी उपलब्धि मिले है. 15 पंचायत जिनमें पारा,रेहंदा, रातिमाली और दौलतपुरा जैसी पंचायतें भी शामिल है. प्रयास किए जा रहे कि और अधिक समूह को ऐसे अलग से काम मिले जिससे और अधिक कमाई हो सके."

पारा पंचायत के सरपंच ओंकार सिंह कहते हैं-"हमें ख़ुशी है कि हमारे ही इलाके के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को काम मिला रहा. अब महिलाएं भी सक्रीय हैं. आत्मनिर्भर बन रहीं."

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