All We Imagine As Light: 30 साल बाद नज़र आएगी Cannes में भारतीय फिल्म

Cannes Film Festival, जो कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित फिल्म फेस्टिवल्स में से एक है, इस वर्ष 2024 में भारतीय लेखिका-निर्देशक Payal Kapadiya की पहली फीचर फिल्म ‘All We Imagine As Light’ को अपने मंच पर feature कर रहा है.

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विधि जैन
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All We Imagine As Light to Cannes Film Festival

Image - Ravivar Vichar

जब कोई फिल्म अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (International Film Festival) में दिखाई जाती है, तो यह उस देश के लिए बहुत गर्व की बात होती है जिस देश से वह फिल्म आई है. इससे देश की सांस्कृतिक पहचान और कला को वैश्विक मंच पर पहचान मिलती है. इसके साथ ही यह देश के फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए भी प्रेरणा बनता है क्योंकि यह उन्हें विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा और काम को पेश करने का अवसर देती है.

ऐसा ही एक प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय मंच है France का Cannes जहां का Cannes International Film Festival पूरी दुनिया के फिल्म निर्माताओं के बीच विख्यात है.

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30 साल बाद दिखेगा भारत Cannes Film Festival में

कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival), जो कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित फिल्म फेस्टिवल्स में से एक है, इस वर्ष 2024 में भारतीय सिनेमा की एक अनूठी पेशकश और लेखिका-निर्देशक पायल कपाड़िया (Payal Kapadiya) की पहली फीचर फिल्म ‘All We Imagine As Light’ को अपने मंच पर feature कर रहा है. यह फिल्म ना केवल अपनी कहानी के लिए बल्कि अपने स्क्रीनप्ले और समाज को गहराई से सोच में डालने के लिए भी प्रशंसा पा रही है. इस फिल्म से भारत Cannes Film Festival में 30 सालों का इंतज़ार ख़त्म कर दोबारा लौट रहा है.

इससे पहले Cannes Film Festival में जाने वाली भारतीय फिल्में थी - Shaji N Karun की Swaham (1994), MS Sathyu की  Garm Hava (1974), Satyajit Ray की Parash Pathar (1958), Raj Kapoor की Awaara (1953), V Shantaram की Amar Bhoopali (1952), और Chetan Anand की Neecha Nagar (1946).

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समाज की गहराइयों को खोजती All We Imagine As Light 

फ्रांस के सुंदर शहर कान्स में आयोजित इस फिल्म फेस्टिवल में ‘All We Imagine As Light’ का प्रदर्शन भारतीय सिनेमा की विविधता और गहराई को दर्शाता है. यह फिल्म भारतीय समाज के कई पहलुओं को उजागर करती है, जैसे कि प्यार, संघर्ष, आशा और सपने, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखते हैं.

यह फिल्म एक भारतीय-फ्रेंच सह-निर्माण है, जो अपनी कहानी के सामाजिक संदेश के माध्यम से भारतीय दर्शकों के साथ-साथ विश्व भर के दर्शकों के लिए भी महत्वपूर्ण है. इसने कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) के मंच पर भारतीय सिनेमा की नई छवि को पेश करने का कार्य किया है, जो कि भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक गर्व की बात है. इस फिल्म की सफलता ने भारतीय निर्माताओं और कलाकारों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खोले हैं.

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