समूह की हड़ताल से मिड मिल को तरसे मासूम

मिड-डे मिल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. मासूम मिड-डे मिल को तरस गए. महिलाएं अपनी मांगों को लेकर अड़ीं हैं. अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर इतना हुआ कि सरकार सहित अफसरों के दम फूल गए.

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अपनी मांगों को लेकर एसएचजी की महिलाएं पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करते हुए (Image Credit: Ravivar Vichar)

समूह की हड़ताल से  मिड मिल को तरसे मासूम 

मध्य प्रदेश के स्कूलों में दिया जाने वाले मिड-डे मिल (Mid Day Meal) व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. मासूम मिड-डे मिल (MDM) को तरस गए. महिलाएं अपनी मांगों को लेकर अड़ीं हैं. अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) का असर इतना हुआ कि सरकार सहित अफसरों के दम फूल गए. स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी इन महिलाओं के जगह-जगह प्रदर्शन जारी है. सांझा चूल्हा (Sanjha Chulha)और मध्याह्न भोजन (MDM) के किचन में ताले लग गए. पिछले कई दिन से मांगे मनवाने और समूह की चेतावनी को अनसुनी करना अब शासन के लिए महंगा पड़ रहा.

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मांगों को लेकर महिलाओं का धरना जारी है (Image Credit: Ravivar Vichar)     

96 हजार समूह,11 लाख सदस्य हड़ताल पर 

हड़ताल (Strike) को लेकर प्रांतीय महिला स्वयं सहायता समूह महासंघ ( State SHG federation) की प्रदेश अध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश कहती है- "हमारी 12 सूत्रीय मांगे सभी जायज है. शासन से हम लगातार मांग कर रहे कि महंगाई का असर हमारी व्यवस्था पर हुआ. बावजूद अभी तक सरकार हमारी मांगों को अनसुनी कर रही.मेरा दावा है कि प्रदेश में हड़ताल सफल है. 96 हजार समूह से जुड़ी 11 लाख महिला सदस्य इस हड़ताल में शामिल हैं. रसोइए दो लाख 32 हजार भी इस हड़ताल में शामिल हैं. सरकार को हमारी समस्या समझ मांगे मानना चाहिए." इस हड़ताल में जिला मुख्यालय और दूसरे स्तर पर भी अनिश्चितकालीन धरना और हड़ताल जारी है. हरदा की जिला अध्यक्ष सुनीता डोले कहती है- "हमारी हड़ताल से शासन को मांगे मानना पड़ेगी. हम हड़ताल जारी रखेंगे."  यही दावा सिवनी की सरिता चौहान, नर्मदापुरम की रोशनी सोनी, श्योपुर की सुनीता नायक और खरगोन की अध्यक्ष सीता ने किया.             

2 करोड़ मासूम मिड-डे मिल के भरोसे 

अधिकांश मजदूर और खेतिहर लोगों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. केंद्र सरकार की इस मध्यान्ह भोजन योजना के भरोसे 2 करोड़ बच्चों का पेट भरता है. ये इस मिड-डे मिल के भरोसे ही हैं. माता-पिता कहते है- "हम सुबह से खेत और मजदूरी पर निकल जाते है. बच्चों के लिए स्कूल में खाना नहीं बन रहा.जैसे-तैसे कभी-कभी डब्बे में रोटी रख बच्चों को स्कूल भेज रहे. जल्दी स्कूल से भोजन मिलना चाहिए."

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बुरहानपुर में एसएचजी की सदस्य ने  अध्यक्ष दीपा सोनी के साथ मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा  (Image Credit: Ravivar Vichar)

महंगाई में सिर्फ दो हजार मानदेय !

प्रदेश अध्यक्ष सरिता कहती है- "इतनी महंगाई के बावजूद रसोइए को सांझा  चूल्हा योजना में मात्र दो हजार रुपए मानदेय मिल रहा. विद्यार्थियों की स्कूल में उपस्थिति कि बजाए सिर्फ 60 प्रतिशत ही भुगतान हो रहा. इसे सही उपस्थिति के अनुसार भुगतान किया जाना चाहिए.रसोइए को 10 और 15 रुपए प्रति छात्र भुगतान किया जाए. मांगें नहीं मानने तक हड़ताल जारी रहेगी."

खबर है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सलाहकार और अधिकारी संघ आपदाधिकारियों को आश्वासन दे चुके हैं. आने वाले दिनों में सरकार एसएचजी महिलाओं की जायज मांगों को मान लेगी.                                     

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