SHGs को मिल रहीं नई पहचान

37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला.भारत विविधता की झांकी है. हर राज्य से आए सेकड़ो self help groups अपने products का परिचय देकर देश की uniqueness को दर्शाते हैं. 

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भूमिका जैन
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SHGs को मिल रहीं नई पहचान

Image: Ravivar Vichar

37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 

भारत विविधता की झांकी है. हर राज्य से आए सैकड़ों self help groups अपने products का परिचय देकर देश की uniqueness को दर्शाते हैं. 

हर state से आए हुए इन SHGs अपनी एक कहानी साथ लेकर आते हैं, जैसे कैसे वो SHG बना, कितनी महिला members हैं, स्टोरी क्या हैं इन समूहों के पीछे,आदि. 

क्या आपको पता है, हर वस्तु जो आप इन SHGs से खरीदते हो, उसका पूरा हिस्सा उस समूह की महिलाओं की ज़िन्दगी को और आसान बनाने में मदद करता है. उन्हें आत्मनिर्भर और confident बनाता है. पुरुषप्रधान समाज की कट्टर सोच से आज़ादी की ओर ले जा कर अपने पैरो पर खड़े होने की शक्ति प्रदान कर रहे है.

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Image Credit: Ministry of Rural Development 

ऐसी ही कुछ कहानियां हैं SHGs की जिन्होंने मेले में अपनी दुकान लगाई- 

धनुष और बाण

स्वयं सहायता समूह के शिव शंकर ने शिल्प मेला के स्टॉल नंबर-355 में उत्तम किस्म के धनुष और बाण प्रदर्शित किए हैं. स्टॉल संचालक जितेंद्र ने बताया कि -

''उनके समूह में 10 सदस्य हैं और उन्होंने लगभग 4 बार सरकारी योजनाओं के माध्यम से ऋण प्राप्त कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया है. उन्होंने कहा कि उनके पिता रतन लाल भी इस व्यवसाय से जुड़े थे, लेकिन उनके बड़े भाई दिवंगत ने धनुष-बाण को खेल के क्षेत्र से जोड़कर अद्वितीय कार्य किया है. समूह द्वारा धनुष के पांच डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी कीमत 1050 से शुरू होकर 2550 रुपए तक है. खेल के क्षेत्र से जुड़े खिलाड़ियों के अलावा शौकीन लोग भी धनुष-बाण को बड़े शौक से खरीद रहें.''

बीकानेरी नमकीन 

स्टॉल संख्या-358 में राजस्थान के self help group द्वारा नमकीन और अचार से संबंधित उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं. राजस्थान के बीकानेर निवासी राजकवर ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाकर इस समूह में महिलाओं को शामिल किया.

उनके गांव में 10 समूह कार्य कर रहे हैं, जिनमें 25 महिलाएं शामिल हैं. उनका समूह राजीविका राजस्थान ग्रामीण विकास परिषद बीकानेर से जुड़ा है. 2013 से श्री आनंदराज स्वयं सहायता समूह बनाकर कार्य शुरू किया गया था. वे बीकानेरी भुजिया, मोटी भुजिया, लहसुन भुजिया, नवरत्न मिक्चर, चना लहसुन पापड़, खट्टी-मीठी मिक्चर आदि उत्पाद बनाती हैं.

अचार के स्वाद ने लुभाया- 

पर्यटक इस स्टॉल में देव नारायण राजीविका स्वयं सहायता समूह द्वारा प्रस्तुत किए गए राजस्थान के प्रसिद्ध अचार का स्वाद भी आनंद ले रहे हैं. इस समूह में 12 सदस्य हैं और वे मिर्ची, मीठा नींबू, कैर आदि के अचार तैयार कर बेच रहे हैं. यहाँ पर्यटक राजस्थान के अचार का स्वाद भी मज़ा ले रहे हैं.

इन मेलो के आयोजन से self help groups अपनी एक पहचान लिख रहे है और सशक्तिकरण की राह पर अपने कदम बड़ा रहें. 

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