Rural Digital Empowerment से भारत चढ़ रहा development की सीढ़ी

Rural India में भी digital empowerment की लहर फैल चुकी है. आज digital empowerment की मदद से प्राकृतिक आपदाओं, healthcare से जुड़े संकट और आर्थिक कठिनाइयों सहित विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने और उन्हें कम करने की क्षमता है.

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विधि जैन
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Image - Ravivar Vichar

भारत में विकास और digital empowerment एक दूसरे से काफ़ी बारीकी से जुड़े हुए हैं. इस बात को खास तौर पर साबित किया है पिछले एक दशक में हुए विकास ने. इस दौरान, आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और सरकारी कार्यों में गति लाने के लिए digital technologies के उपयोग को government और private sector दोनों के ठोस प्रयासों से बढ़ाया गया. भारत सरकार द्वारा 2015 में शुरू किया गया 'Digital India Initiative', भारत को digitally empowered society में बदलने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल रही है.

 

ग्रामीण भारत (Rural India) में भी digital empowerment की यह लहर फैल चुकी है. आज digital empowerment की मदद से प्राकृतिक आपदाओं, healthcare से जुड़े संकट और आर्थिक कठिनाइयों सहित विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने और उन्हें कम करने की क्षमता है. इसका यह मतलब नहीं है कि डिजिटल साक्षरता अकेले इन सभी स्तिथयों से निपटने के लिए काफी है. यह तो एक ज़रिया है जो हमें सफलता ढूंढने में मददगार है.

क्यों है digital empowerment की ज़रूरत?

आज mobile phone सिर्फ एक दूसरे से बात करने के लिए नहीं रह गए है. बल्कि आज उसकी मदद से हम घर बैठे न जाने कितनी सुविधाओं का लाभ उठा रहे है. आज bank से लेकर hospital तक हमारे एक phone में समा हुआ है. इसलिए हर किसी को आज digitally empower होने की सख्त ज़रूरत है.

ग्रामीण भारत में डिजिटल सशक्तिकरण कई कारणों से महत्वपूर्ण है, जिसमें आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और सरकारी पहलू शामिल हैं. Technology हमारे जीवन और global economy का अभिन्न अंग बनती जा रही है. इस दौरान ग्रामीण आबादी तक डिजिटल उपकरणों की पहुंच और डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना ज़रूरी है. डिजिटल सशक्तिकरण समान विकास को बढ़ावा देने के लिए एक आवश्यक अस्त्र है.

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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक तत्काल पहुंच की कमी के कारण लोगों को उन बीमारियों और स्थितियों के इलाज में देरी हो जाती है, जिनमें समय पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिए, डेंगू जैसी बीमारी के फैलने के दौरान, सूचना में देरी से संक्रमण और मृत्यु दर बढ़ने कि संभावना रहती है.

Digitization इस समस्या का हल धुंध सकता है. Digital Platforms बीमारियों के लक्षण, रोकथाम और उपचार के बारे में जानकारी को तेजी से सभी तक पहुंचा सकता है. Telemedicine सेवाएं महत्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सलाह प्रदान करती हैं जो संभावित रूप से समय पर मदद उपलब्ध करा जीवन बचा सकती हैं.

इसके अलावा, ग्रामीण उद्यमियों और किसानों के लिए, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म products और services को खरीदने और बेचने, नए बाज़ारों तक पहुंचने और उनके संचालन में सुधार के लिए नए रास्ते प्रदान करते हैं. Mobile banking और digital wallet सहित डिजिटल वित्तीय सेवाएं (digital financial services), आसान वित्तीय लेनदेन और अधिक वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तियों और व्यवसायों को आगे बढ़ने में मदद मिलती है.

सबसे महत्वपूर्ण, डिजिटल साक्षरता और पहुंच महिलाओं के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी होती है, जो उन्हें शिक्षा, उद्यमिता और समाज में भागीदार होने के अवसर प्रदान करती है. यह सब कुछ समय पहले तक सांस्कृतिक या सामाजिक बाधाओं के कारण पहुंच से बाहर थे. महिलाओं को सशक्त बनाकर, डिजिटल उपकरण लैंगिक समानता (gender equality) और महिला सशक्तिकरण (women empowerment) को बढ़ावा देने और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को मजबूत करने में मदद करते हैं. साथ ही, Digital Platforms ग्रामीण आबादी को व्यापक समुदायों से जुड़ने, information share करने और सामान्य मुद्दों के लिए एकजुट होने में सक्षम बनाते हैं. Connectivity की यह भावना एक मजबूत सामुदायिक बंधन को बढ़ावा देती है.

Digital literacy से ग्रामीण महिलाएं बन रही सशक्त

Digital Financial Services ने ग्रामीण महिलाओं को मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है. ग्रामीण भारत के कई हिस्सों में महिलाएं SHGs का हिस्सा हैं, जो अब अपने वित्तीय लेनदेन के लिए Mobile Banking का तेजी से उपयोग कर रही हैं. यह डिजिटल पहुंच महिलाओं को बैंक जाए बिना ही पैसे बचाने, लेनदेन करने और क्रेडिट तक पहुंचने में मदद करती है.

Gaatha, Okhai और SANGRAHA जैसे कई प्लेटफार्म बड़ी संख्या में महिलाओं सहित कारीगरों को अपने handicrafts, कपड़े और अन्य उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिए एक market देते हैं. ये प्लेटफ़ॉर्म न केवल ग्रामीण महिला कारीगरों को marketing platform प्रदान करते हैं, बल्कि digital marketing और online selling पर उपकरण और प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जाता है.

ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, भारत सरकार और विभिन्न गैर सरकारी संगठनों ने इनके बीच डिजिटल साक्षरता और पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहल शुरू की हैं. जिनमें से कुछ है:

  • Digital India - यह एक प्रमुख initiative है जिसका उद्देश्य भारत को digitally empowered society में बदलना है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं सहित प्रत्येक नागरिक को उपयोगिता के रूप में डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
  • BharatNet - इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना, डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना है.
  • Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharta Abhiyan (PMGDISHA) - यह पहल विशेष रूप से महिलाओं सहित हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर ध्यान देने के साथ ग्रामीण परिवारों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने का लक्ष्य रखती है.

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हमें यह समझना ज़रूरी है कि डिजिटल सशक्तिकरण ग्रामीण भारत के सामने आने वाली सभी चुनौतियों के लिए रामबाण नहीं है. पर यह सेवाओं की पहुंच में सुधार और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए एक शक्तिशाली टूल साबित हुआ है. डिजिटल साक्षरता, बुनियादी ढांचे और सेवाओं में निवेश करके, विभिन्न संकटों के प्रभावों को कम करने और ग्रामीण आबादी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए महत्वपूर्ण क्षमता रखती है.

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