व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखा कर SHG ने किया शर्मिंदा

महिलाओं को इतने बड़े लालच में किसने फंसाया ? महिलाओं को फर्जी किसानों के नाम किसने दिए ? क्या सिर्फ एक बाहरी ऑपरेटर की इतनी बड़े गबन करने की हिम्मत हुई ! या इस पूरे खरीदी केंद्र को कहीं और से राजनीतिक हस्तक्षेप से चलाया जा रहा था.

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SHG scam fraud

सतना जिले के रामनगर थाने में समूह की आरोपी महिलाएं (Image Credit: Ravivar Vichar)

व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखा कर एसएचजी ने किया शर्मिंदा  

इन दिनों घरेलु और बेरोजगार महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र की सरकार पूरी ताकत झोंक रही. राज्यों के मुख्य मंत्री से लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों के प्रमुख अंश में महिला और स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की तारीफ में कशीदे कसे जा रहे. सरकारों ने महिलाओं और उनके समूह को बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में अवसर दिए. ऐसे में मध्यप्रदेश (MP) के सतना (Satna) में समूह (SHG) की महिलाओं ने शर्मसार कर दिया.  समूह की महिलाओं ने भरोसा इतना तोड़ा पुलिस में प्रकरण और फिर गिरफ्तारी तक की नौबत आ गई. यह पूरा मामला गेहूं (Wheat) की सरकारी खरीदी (Purchasing)और लाखों रुपए के फर्जी भुगतान का है.

गेहूं ख़रीदा नहीं फर्जी भुगतान 57 लाख का !

इस मामले को यूं समझिए. सतना (Satna) जिले के रामनगर तहसील में अरगट गांव में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) सुलखमा को गेहूं खरीदी का 2023-24 में शासन ने काम दिया. रिकॉर्ड के अनुसार समूह ने 8981.50 क्विंटल गेहूं खरीदी  की इंट्री उपार्जन पोर्टल पर कर उसे रेडी टू ट्रांसपोर्ट कर दिया. लेकिन 2681.50 क्विंटल गेहूं की खरीदी तो वास्तव में हुई नहीं.  समूह ने बिना गेहूं की बोरियां केंद्र पहुंचे रजिस्टर में दर्ज कर लिए. फर्जी तरीके से कागज़ों में दर्ज इस एक्स्ट्रा 2681.50 क्विंटल यानी 5363 बोरी गेहूं की खरीदी को 15 किसानों के नाम पर दिखा दिया. पहली नज़र में शासन को 56 लाख 98 हजार 187 रुपए की चपत लगाई. समूह ने यह पैसा 10 किसानों के खाते में डाल भी दिए.15 लोगों पर धोखाधड़ी (Scam) सहित दूसरी धाराओं में प्रकरण दर्ज किया. इसमें 14 महिलाएं भी शामिल है.11 लोग गिरफ्तार कर लिए.

   

लालच में फंसी महिलाएं !

इस पूरे मामले में एक बाहरी कम्यूटर ऑपरेटर की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही. इसके अलावा इतने बड़े घपले में शामिल समूह (SHG) की अध्यक्ष आशा यादव,सचिव फुलझरिया सहित एक दूसरी ऑपरेटर को भी आरोपी बनाया. सवाल यह है घरेलु महिलाओं को इतने बड़े लालच में किसने फंसाया ? महिलाओं को फर्जी किसानों के नाम किसने दिए ? क्या सिर्फ एक बाहरी ऑपरेटर की इतनी बड़े गबन करने की हिम्मत हुई ! या इस पूरे खरीदी केंद्र को कहीं और से राजनीतिक हस्तक्षेप से चलाया जा रहा था. और यदि किसी भी परिस्थिति में समूह की महिलाओं ने फर्जी दस्तावेजों पर साइन किए. या लाखों की एक्स्ट्रा कमाई देख नीयत बिगड़ गई, इन आरोपी महिलाओं ने उन समूह के अवसर और रास्ते भी बंद कर दिए जो पूरी ईमानदारी से अपने को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मेहनत कर रही. ऐसी मेहनती महिलाएं और उनके लिए बेहतर सोचने वाला समाज शर्मिंदा है. 

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