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भारत में सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे समय रहते रोका और नियंत्रित किया जा सकता है. इसके बावजूद यह बीमारी हर साल हजारों महिलाओं की जान ले रही है. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर 8 मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर से मर जाती है. यह स्थिति केवल चिकित्सा व्यवस्था की नहीं, बल्कि नीति, सामाजिक चुप्पी और महिलाओं के स्वास्थ्य को लगातार नजरअंदाज करने की भी कहानी है.
जनवरी 2026 में AIIMS, नई दिल्ली द्वारा शुरू किया गया मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम (Free cervical cancer screening programme) इस गंभीर संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
सर्वाइकल कैंसर क्या है?
सर्वाइकल कैंसर (Cervical cancer India) गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होने वाला कैंसर है. यह कैंसर अचानक नहीं होता, बल्कि कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होता है. शुरुआती चरणों में इसके लक्षण बेहद मामूली या बिल्कुल नहीं होते, इसी कारण अधिकतर मामलों में इसका पता देर से चलता है.
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण
लगभग सभी मामलों में सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) होता है.
HPV एक सामान्य वायरस है.
यह मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है.
अधिकतर मामलों में शरीर इसे खुद ही खत्म कर देता है.
लेकिन यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो यह कैंसर का कारण बन सकता है.
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति: आंकड़े क्या कहते हैं?
भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है.
महत्वपूर्ण आंकड़े
हर साल लगभग 1.23 लाख नए मामले सामने आते हैं.
अनुमानित 35,000 से 80,000 महिलाओं की मृत्यु प्रतिवर्ष होती है.
दुनिया के कुल सर्वाइकल कैंसर मामलों का लगभग 20 प्रतिशत भारत में पाया जाता है.
नियमित स्क्रीनिंग कराने वाली महिलाओं की संख्या 2 प्रतिशत से भी कम है.
समस्या कहां है?
भारत में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी का पता अक्सर बहुत देर से चलता है. सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण या तो बेहद मामूली होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते. नतीजतन, अधिकांश महिलाएँ तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुँचतीं, जब तक असामान्य रक्तस्राव, लगातार दर्द या गंभीर संक्रमण जैसे लक्षण सामने नहीं आ जाते. चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार भारत में सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले तीसरे या चौथे चरण में पहचाने जाते हैं, जहाँ इलाज जटिल, महँगा और कम प्रभावी हो जाता है.
इस देर से पहचान के पीछे एक बड़ी वजह ग्रामीण और गरीब इलाकों में जांच की सुविधाओं का अभाव भी है. देश की बड़ी महिला आबादी गाँवों और छोटे कस्बों में रहती है, जहाँ HPV DNA टेस्ट या पैप स्मियर जैसी जांच या तो उपलब्ध नहीं हैं या नियमित रूप से नहीं हो पातीं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, लंबी दूरी तय करने की मजबूरी, काम छोड़ने का आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच — ये सभी कारण मिलकर महिलाओं को समय पर जांच से दूर कर देते हैं.
इसके साथ-साथ सामाजिक झिझक और जानकारी की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है. सर्वाइकल कैंसर प्रजनन अंगों से जुड़ा होने के कारण अब भी कई परिवारों और समुदायों में इस पर खुलकर बात करना असहज माना जाता है. कई महिलाएँ जांच को शर्म, डर या सामाजिक सवालों से जोड़कर देखती हैं, वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं होती कि नियमित स्क्रीनिंग और HPV वैक्सीन उनके जीवन को बचा सकती है. इस चुप्पी और अज्ञान के बीच बीमारी बिना शोर के आगे बढ़ती रहती है.
मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम का मुफ्त सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम
AIIMS, नई दिल्ली ने जनवरी 2026 में एक विशेष अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मुफ्त जांच और रोकथाम की सुविधा देना है.
इस कार्यक्रम में क्या शामिल है?
महिलाओं के लिए स्क्रीनिंग
आयु वर्ग: 30 से 65 वर्ष.
जांच: WHO द्वारा अनुशंसित HPV DNA टेस्ट.
समय: सोमवार से शुक्रवार.
बच्चियों के लिए HPV टीकाकरण
आयु वर्ग: 9 से 14 वर्ष.
शनिवार को मुफ्त टीकाकरण.
सामुदायिक पहल
झज्जर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में स्क्रीनिंग शिविर.
नर्सिंग स्टाफ और प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग की भागीदारी.
सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे संभव है?
HPV वैक्सीन
HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है.
यह लगभग 90 प्रतिशत मामलों में कैंसर को रोक सकती है.
भारत में स्वदेशी वैक्सीन CERVAVAC उपलब्ध है.
टीकाकरण सबसे प्रभावी किशोरावस्था में होता है.
नियमित स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?
सर्वाइकल कैंसर के पहले शरीर में प्री-कैंसरस बदलाव आते हैं, जिन्हें जांच के जरिए समय रहते पहचाना जा सकता है.
जांच के प्रमुख तरीके
HPV DNA टेस्ट.
पैप स्मियर टेस्ट.
एसिटिक एसिड द्वारा दृश्य परीक्षण.
यह केवल स्वास्थ्य नहीं, सामाजिक मुद्दा भी है!
महिलाओं के स्वास्थ्य को अक्सर परिवार और समाज में प्राथमिकता नहीं दी जाती. सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियां इसी चुप्पी और उपेक्षा में पनपती हैं. जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है.
AIIMS जैसे संस्थानों की पहल तभी सफल होगी जब समाज, सरकार और परिवार मिलकर महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे.
WHO का 90-70-90 लक्ष्य और भारत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए तीन लक्ष्य तय किए हैं:
90 प्रतिशत लड़कियों का HPV टीकाकरण.
70 प्रतिशत महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग.
90 प्रतिशत मरीजों को समय पर इलाज.
भारत के लिए यह केवल एक स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन से जुड़ा प्रश्न है. सर्वाइकल कैंसर कोई अनिवार्य मृत्यु नहीं है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसे समय पर जांच, सही नीति और सामाजिक जागरूकता से रोका जा सकता है. AIIMS का मुफ्त स्क्रीनिंग कार्यक्रम एक शुरुआत है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब महिलाओं के स्वास्थ्य को वास्तविक प्राथमिकता दी जाएगी.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हाँ, शुरुआती अवस्था में पता चलने पर इसका इलाज संभव है और सफलता दर काफी अच्छी होती है.
HPV पॉजिटिव होने का मतलब क्या कैंसर है?
नहीं. इसका मतलब केवल वायरस मौजूद है. ज्यादातर मामलों में शरीर इसे खुद ही नियंत्रित कर लेता है.
क्या जांच दर्दनाक होती है?
अधिकतर मामलों में जांच हल्की असुविधा ही देती है, दर्द नहीं होता.
क्या अविवाहित महिलाओं को भी जांच करानी चाहिए?
हाँ. उम्र और जोखिम के हिसाब से सभी महिलाओं को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए.
क्या पुरुषों को भी HPV वैक्सीन लेनी चाहिए?
हाँ. यह संक्रमण के फैलाव को रोकने में मदद करती है और पुरुषों में भी सुरक्षा देती है.
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