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अपने खेत में काम करती हुई प्रेम बाई Photograph: (Image: Ravivar)
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा (Agar Malwa) जिला अंतर्गत गांव खांखरी की प्रेम बाई ने अपनी मेहनत से नाम कमाया और आर्थिक संपन्नता से घर की दशा बदल दी.न केवल खेती बल्कि पशु पालन में भी प्रेम बाई सफल रही.अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही.घर की दहलीज़ से निकल कर अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गई.
मिल्क प्रोडक्ट्स और मवेशियों की बन गई मालकिन
आगर ज़िले के खांखरी गांव की रहने वाली प्रेम बाई कहती है -"मैं तो कभी घर से निकली भी नहीं.पति प्रभुलाल गुर्जर थोड़ी बहुत खेती की ज़मीन को संभालते.ज्यादा इनकम नहीं थी.मैं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी.हम कुछ महिलाओं ने मिलकर देवराज स्वयं सहायता समूह बनाया.मिशन की मदद से कई तरह के लोन की सुविधा मिल गई.शुरू मैंने बकरी और फिर भैंस खरीदी.इस समय 5 भैंसे हो गई.अब मैं दूध, मावा सहित सभी प्रोडक्ट्स बेचती हूं.इससे मेरी कमाई होने लगी और परिवार में मदद कर सकी."
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समूह में लगातार मेहनत करने की वजह से SRLM के ब्लॉक मैनेजर और डीपीएम ने प्रेम बाई को ज्योति सामुदायिक सहयोग संस्था कानड़ से जोड़ा. प्रेम बाई ने अन्य महिलाओं को जागरूक कर 105 समूह बना दिए.
बगीचे में संतरों की बहार और बढ़ा दिए उत्पाद
DAY SRLM भोपाल के दिनेश दुबे बताते हैं -"शासन की योजनाओं का पूरा लाभ दिया गया.समूह और निजी लोन समय से उतरने के कारण प्रेम बाई की आर्थिक स्थिति लगातार बेहतर हुई.लाड़ली बहना के अलावा उन्होंने पांच गांव को ODF बनवाने में ख़ास भूमिका निभाई." प्रेम बाई आज गांव में मिसाल बन चुकी है.
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