काम की ज़िद ने दिलाई पद्मश्री तक की पहचान

बिहार के मुज्जफरपुर जिले की रहने वाली महिला ने अपनी मजबूरियों को आड़े नहीं आने दिया. शादी के बाद कुछ दिन घरेलु महिला बन कर रही. यह ज़िंदगी रास नहीं आई. काम की ज़िद ने इसी महिला को पद्मश्री तक पहुंचा दिया.

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काम की ज़िद ने दिलाई पद्मश्री

राजकुमारी देवी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री अवार्ड लेते हुए (Image: Ravivar Vichar)    

पूरी पढ़ाई भी नहीं हुई और राजकुमारी (Rajkumari) की शादी बिहार (Bihar) के मुजफ्फर (Muzaffarpur) जिले के सरैया गांव (Saraiya Village) से आनंदपुर (Anandpur) कर दी गई. घरेलु महिला बनकर ज़िंदगी की शुरुआत हुई.धीरे-धीरे पढ़ाई शुरू की और  SHG से जुड़ गई. यहीं से नई ज़िंदगी की शुरुआत हुई.

अचार और जैम का स्वाद शहरों में पहुंचा घर-घर 

राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) की कहानी बड़ी दिलचस्प है. विरोध के बावजूद ससुराल आनंदपुर में पढाई पूरी की. बावजूद राजकुमारी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (Dr.Rajendra Prasad Central Agriculture University) से खेती (Agriculture) की ट्रेनिंग भी ली. अपने घर की कमाई बढ़ने के लिए खेती सीखी. अपनी ज़मीन पर सब्जियां, फल, पेड़ उगाना शुरू किया. इसी गांव के किसान अपनी उपज को सीधे बाज़ार ले जाकर बेच देते. राजकुमारी ने अपने ब्रांड (Brand) बनाया. इसकी बिक्री बढ़ी.

ये हैं किसान चाची, 150 रुपए में शुरू किया था काम; आज विदेशों में भी बेंचती  हैं प्रोडक्ट, खूब होती है कमाई | This is the farmer aunt Rajkumari Devi of  Bihar,

साइकल पर अपना प्रोडक्ट बेचने जाते हुए राजकुमारी देवी (Image: Google)    

 

राजकुमारी बताती है- मैंने  अचार और जैम जैसे प्रोडक्ट्स बनाने की शुरुआत की. पहले घर से ही और फिर आसपास बेचा. फिर भी उतनी बिक्री नहीं हो रही थी. आखिर मैंने साइकल पर सवार होकर आसपास के गांव में जाना शुरू किया. घर सहित समाज के हो रहे विरोध की मैंने परवाह नहीं की. आखिर मेरा बिज़नेस चल पड़ा." 

SHG के दिए हौसले से मिलने लगे अवार्ड 

समय के साथ राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) की पहचान बढ़ने लगी.  स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से मिले हौसले से अवार्ड भी मिलने लगे. राजकुमारी ने लगभग 300 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का गठन खुद की मेहनत से किया. दूसरी महिलाओं को भी प्रोत्साहित किया.



राजकुमारी देवी  (Rajkumari Devi) आगे बताती है- "मैंने जरूरत के हिसाब से 20 से अधिक फ्लेवर के जैम और अचार तैयार किए. मुझे ख़ुशी है गांव में लोग मुझे "साइकल चाची" (Cycle Chachi)कह कर बुलाने लगे. मेरा तैयार किया प्रोडक्ट्स अब दिल्ली और मुंबई के आउटलेट्स (Outlates)पर मिल जाता है.मैंने कभी नहीं सोचा था कि छोटी सी शुरुआत और मेहनत करते-करते पद्मश्री (Padma shri) का सम्मान दिलवाएगी." 

बन चुकी है सक्सेस स्टोरी डॉक्यूमेंट्री 

उपलब्धियों पर राजकुमारी पर सेंट्रल गवर्मेंट डॉक्यूमेंट्री भी बना चुकी है. जानकारी के अनुसार 2006-07 में उन्हें  ‘किसान श्री’ से सम्मानित किया. 2020 में कृषि और महिला सशक्तिकरण (Woman Empowerment) के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए  पद्मश्री (Padma shri) से नवाजा गया. इसके अलावा सरैया कृषि विज्ञान केंद्र के सलाहकार (Advoisor) के रूप में भी चुना गया और उन्होंने कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के सदस्य के रूप में शामिल होने का मौका मिला. 

.Padma Shri Rajkumari Devi: The Inspiring Journey of Kisan ...

राजकुमारी देवी (Image: Google)    

राजकुमारी का कहना है- "महिलाएं अपनी ताकत को समझें.लक्ष्य बना कर मेहनत करें तो आत्मनिर्भर बनने के साथ खुशियां  भी मिलेगी."

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