तालिबान का नया आपराधिक कानून: अफगानिस्तान में महिलाओं पर सख्त सज़ा और नए नियम

तालिबान के नए आपराधिक कानून के तहत अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं और रोजमर्रा के व्यवहार पर भी सज़ा का प्रावधान किया गया है.

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रिसिका जोशी
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अफगानिस्तान में लागू नए आपराधिक कानून में महिलाओं के लिए निर्धारित सज़ा के प्रावधान. Photograph: (AI Representative Image)

तालिबान ने अफगानिस्तान में आधिकारिक रूप से नया आपराधिक कानून लागू किया है, जिसमें ऐसे सख्त कानूनी प्रावधान शामिल हैं जो सामाजिक नियंत्रण, पारंपरिक सोच और धार्मिक नियमों को व्यक्तिगत अधिकारों से ऊपर रखते हैं. यह कानून महिलाओं को अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि इसमें उनके आने-जाने, रिश्तों, पारिवारिक निर्णयों और व्यक्तिगत विश्वासों को सख्ती से नियंत्रित किया गया है, जबकि हिंसा से सुरक्षा बहुत सीमित है.

बिना अनुमति मायके जाने पर महिला को जेल

इस कानून के Article 34 के तहत महिलाओं की आवाजाही की स्वतंत्रता सीमित की गई है. इसमें कहा गया है कि यदि कोई विवाहित महिला अपने मायके में पति की अनुमति या किसी उचित धार्मिक कारण के बिना रहती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है. यहां तक कि यदि अदालत आदेश देती है और परिवार उसे वापस नहीं भेजता, तो परिवार के सदस्यों को भी सज़ा दी जा सकती है. यह प्रावधान विवाहित महिलाओं को अपने रहने का निर्णय खुद लेने की अनुमति नहीं देता, खासकर तब जब पति-पत्नी के बीच विवाद हो.

पत्नी पर गंभीर हिंसा करने पर भी पति को हल्की सज़ा

Article 32 पति द्वारा की गई हिंसा से जुड़ा है. यदि पति पत्नी को इतनी बुरी तरह मारता है कि हड्डी टूट जाए, घाव हो जाए या शरीर पर साफ निशान दिखें, तो उसे केवल 15 दिन की जेल हो सकती है, वह भी तब जब पत्नी अदालत में इसे साबित कर सके. इसके विपरीत, गैर-रिश्तेदार पुरुष और महिला के बीच मामूली शारीरिक संपर्क पर एक साल तक की जेल हो सकती है। यह नियम सज़ा में असमानता को दिखाता है.

धर्म छोड़ने पर महिलाओं के लिए कठोर सज़ा

Article 58 के अनुसार यदि कोई महिला इस्लाम छोड़ देती है, तो उसे आजीवन कारावास की सज़ा दी जा सकती है और हर तीन दिन में 10 कोड़े लगाए जा सकते हैं, जब तक वह दोबारा धर्म स्वीकार न कर ले। पुरुषों के मामले में उन्हें तीन दिन का समय दिया जाता है ताकि वे अपने निर्णय पर विचार कर सकें. यह नियम कानून के लागू होने में अंतर को दर्शाता है.

कानून के जरिए आर्थिक निर्भरता लागू

Article 55 के अनुसार यदि कोई पुरुष तय भरण-पोषण नहीं देता, तो उसे जेल हो सकती है. चूंकि महिलाओं को आश्रित माना जाता है, इसलिए यह नियम उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को सीमित करता है और उन्हें पुरुष पर निर्भर बनाए रखता है. यह कानून सामाजिक व्यवहार पर सख्त नियंत्रण रखता है और घरेलू हिंसा के मामलों में सीमित सुरक्षा प्रदान करता है.

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